लालमनी मेमोरियल संस्थान नवटोली के द्वारा टीपीसी भवन रांटी मे मिथिला पेंटिंग के कलाकारों का समन्वय बैठक किया गया। जिसमें इस कला के कलाकारों के समक्ष आने वाली समस्याओं और उसके निराकरण पर विचार विमर्श किया गया। संस्था के सचिव जितेंद्र मोहन झा ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है। आज के दिन ही 29 मार्च 1857 को मंगल पांडे ने बैरकपुर (पश्चिम बंगाल) में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह किया था, जो आगे चलकर प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की चिंगारी बनी। आज उसी ऐतिहासिक दिन को लालमनी मेमोरियल संस्थान द्वारा मिथिला पेंटिंग के कलाकारों को उनकी आर्थिक शोषण से मुक्ति दिलाने के लिए यह बैठक की गई है। उन्होंने कहा कि रांटी में इस कला के सैकड़ों कलाकार है, जिनसे पेंटिंग लेकर बिचौलिए भाड़ी मुनाफा कमा रहे हैं, लेकिन इस कला के महिला कलाकारों को उनकी परिश्रम का उचित मूल्य भी नहीं मिलता है। जो इस कला के कलाकारों का शोषण है। जबकि उनकी कला के कद्रदानों की कमी नहीं है। श्री झा ने कहा कि क्या विडंबना है कि सैकड़ों कलाकारो में महज कुछ ही को लोग पहचानते हैं, जबकि यहां और भी कई है। उन्होंने कहा कि लालमनी मेमोरियल संस्थान उन कलाकारों को उनकी कलाकारी का उचित मूल्य उपलब्ध कराने व उनको वैश्विक स्तर पर पहचान के लिए कृतसंकल्पित हैं। इसके लिए इन महिला कलाकारों को उचित बाजार उपलब्ध कराने व उनके कद्रदानों को उनसे मिलाने और उनसे सीधे संपर्क के लिए काम करेगी। बैठक में सीमा दास, कुमारी रीना पासवान, रानी दत्ता, अंजू दत्ता, बुच्ची देवी, अजमतून निशा, रंजीता मिश्रा, रेखा पासवान,संस्था के कोषाध्यक्ष मंगल राय, राजकुमार सहित सैकड़ों महिला कलाकार उपस्थित थी।


Lalmani Memorial Sansthan (LMS):