मधुबनी – मिथिला पेंटिंग कलाकारों की समीक्षा बैठक लालमनी मेमोरियल संस्थान नवटोली में की गई। संस्थान के सचिव जितेंद्र मोहन झा ने कहा कि जिले में बहुत सारी महिलाएं इस क्षेत्र में सक्रिय है, बस कुछ लोग उन्हें जानते हैं कि ये भी मिथिला पेंटिंग बनाती है, लेकिन उनकी कोई पहचान नहीं है, उन्हें अंधेरे में रखा जाता है। जिससे उनका मनोबल प्रभावित होता है। यह पेंटिंग विश्व स्तर अपनी पहचान रखती है, लेकिन इन कलाकारों को सरकार द्वारा मिलने वाली सुविधाओं के बारे में भी उन्हें कोई जानकारी नहीं होती है या उन्हें यह जानकारी समय से नहीं मिलती है। इस कारण वो उन लाभों से वंचित रह जाती है, जो उनके लिए बेहद जरूरी और बुनियादी है। उनकी पेंटिंग का उन्हें उचित मूल्य और समय पर नहीं मिलता है। सब कुछ अनिश्चित रहता है। जिससे उन्हें आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जानकारी और जागरूकता के अभाव में कलाकारों का शोषण किया जा रहा है। इन गरीब कलाकारों के सामने पूंजी निवेश की सबसे बड़ी समस्या होती है, जबकि उनकी कला के कद्रदानों की कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि लालमनी मेमोरियल संस्थान मिथिला पेंटिंग के कलाकारों को एकजुट कर उनकी समस्याओं के निदान के लिए कृतसंकल्पित होकर काम कर रही है। जब तक उनकी एक निश्चित आमदनी की व्यवस्था नहीं होगी वो आर्थिक रूप से सक्षम नहीं होगी। संस्थान उनके लिए एक निश्चित मासिक आमदनी के लिए योजना पर काम कर रही है, जिससे वो आत्मनिर्भर बन सके। संस्थान इसके साथ ही कथाकारों के परिवार को आपात स्थिति में उनकी मदद कर उनका संबंल बनाए रखने के दिशा में काम करने की रणनीति पर भी काम कर रही है। बैठक में रामजी नायक, अंकित कुमार, सीमा दास रानी दत्ता, बुच्ची देवी अजमतून निशा मीनू मंडल मंगल राय आदि थे।



Lalmani Memorial Sansthan (LMS):